'मणिद्वीप', एक भवन नहीं है, यह आस्था, साधना, प्रेम, चैतन्यता एवं संस्कार से परिपूर्ण एक केन्द्र है जहाँ स्वयं जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी विराजती हैं। भौतिक जगत में मणिद्वीप जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी के दिव्य लोक का प्रतीक है। यह स्थान चैतन्य कणों से सराबोर साधनास्थली है जहाँ शांत चित्त बैठने मात्र से साधक पूर्णतः सकारात्मक सोच से ओत-प्रोत हो जाता है एवं स्वतः ही आनंद की अनुभूति होने लगती है। यहाँ लगातार आते रहने से व्यक्ति में मानवीय संवेदना, करूणा, संयम और प्रेम का संचार होने लगता है तथा “वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना का उदय होता है। अब प्रश्न यह उठता है कि यह सब कैसे संभव हो सकता है?
- युगप्रवर्तक अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा
- युगप्रवर्तक अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा