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मणिद्वीप क्या है?

'मणिद्वीप', एक भवन नहीं है, यह आस्था, साधना, प्रेम, चैतन्यता एवं संस्कार से परिपूर्ण एक केन्द्र है जहाँ स्वयं जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी विराजती हैं। भौतिक जगत में मणिद्वीप जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी के दिव्य लोक का प्रतीक है। यह स्थान चैतन्य कणों से सराबोर साधनास्थली है जहाँ शांत चित्त बैठने मात्र से साधक पूर्णतः सकारात्मक सोच से ओत-प्रोत हो जाता है एवं स्वतः ही आनंद की अनुभूति होने लगती है। यहाँ लगातार आते रहने से व्यक्ति में मानवीय संवेदना, करूणा, संयम और प्रेम का संचार होने लगता है तथा “वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना का उदय होता है। अब प्रश्न यह उठता है कि यह सब कैसे संभव हो सकता है?

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हमारे पथप्रदर्शक

दिव्य अमृतुल्य ज्ञान एवं साधना पद्धति

"संसार को त्याग कर नहीं, वरन् गृहस्थ में रहते हुए व अपने सभी कर्त्तव्य अनासक्तभाव से करते हुए भी ईश्वरीय कृपा व दर्शन प्राप्त किये जा सकते हैं।"

- युगप्रवर्तक अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा

निष्काम कर्म साधना

"ईश्वर का निःस्वार्थ स्मरण एवं प्रेम ही मानव जीवन का आधार है।"

- युगप्रवर्तक अध्यात्मयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा

निष्काम कर्म साधना के अन्तर्गत गतिविधियाँ

प्रशंसापत्र

वे हमारे बारे में क्या बात कर रहे हैं

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श्री राज कुमार कोठारी

व्यवसायी, जोधपुर

मणिद्वीप आने से पहले मैं सदा भविष्य की आशंका एव चिंताओं से ग्रसित रहता था। मैं बहुत ज्यादा गुस्सैल और आक्रोशित रहता था। इसके कारण इसका प्रभाव मेरे आचरण एवं व्यवहार एवं मेरे पारिवारिक जीवन में भी झलकता था। मणिद्वीप में माँ बसन्ती जी से चर्चा करने एवं उनसे समझने के पश्चात् मुझे ऐसा एहसास हुआ कि जो कुछ मैंने अभी किया है उसको /'माँ'/ और भैया को समर्पित कर देना चाहिए। मैंने जब उसे चीज को एहसास किया और उसे लागू करने की कोशिश की तो मेरे आचरण एवं व्यवहार में धीरे-धीरे फर्क आने लगा और मेरा गुस्सा काफी कम हो गया। अब गुस्सा आता नहीं है और यदि कभी आता भी है तो वह क्षणिक होता है, कुछ समय के लिए रहता है ...

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श्रीमती तारा राठी

गृहणी, जोधपुर

मैं पिछले 17 साल से मणिद्वीप से जुड़ी हुई हूँ। मैं अपने आपको बहुत ही भाग्यशाली मानती हूँ कि मैं उस मणिद्वीप परिवार की सदस्य हूँ जिसने मेरा जीवन खुशियों से भर दिया।<br>मणिद्वीप में आने के बाद जीवन जैसे एक दम बदल गया। हमें यहाँ हमारे मनुष्य जीवन का असली उद्देश्य पता चला। हम गृहस्थ में रहते हुए बिना कुछ छोड़े अध्यात्म की ओर बढ़ सकते हैं। समय का सदुपयोग और वाणी का संयम करना सीखा। सोच सकारात्मक बनी और बुद्धि विवके जागृत हुआ जिससे सही-गलत का निर्णय ले सकते हैं। भौतिक शरीर का महत्व समझ कर इस काभी ध्यान रखते हैं। परिवार और समाज में कब, कहाँ, कैसे और कितना बोलना है यह सोच समझ कर जाते हैं। हर परिस्थि...

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प्रो. वी.के. भंसाली

पूर्व विभागाध्यक्ष, विद्युत अभियान्त्रिकी एम.बी.एम. इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर , भूतपूर्व निदेषक, जीत इंजीनियरिंग कॉलेज, जोधपुर

ज्ञानयोगी श्री नंदकिशोर शारदा एक दूरदर्शी और गहन विचारक थे। स्वामी विवेकानन्द स्टूडेंट्स वेलफेयर चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से उन्होंने समाज की उन वंचित लड़कियों को न केवल वित्तीय सहायता प्रदान की जो उपेक्षा, असहायता और पूर्ण निराशा का जीवन जी रही थीं बल्कि उन्हें एक नया सार्थक जीवन भी दिया। उनका दृढ़ विश्वास था कि नैतिक और मानवीय मूल्यों के बिना शिक्षा निरर्थक है। इसलिए, उन्होंने मानवीय गरिमा, आत्मविश्वास, करुणा और भविष्य की चुनौतियों का निडरता से सामना करने की ताकत से समृद्ध शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों का मिश्रण किया।

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