'मणिद्वीप', एक भवन नहीं है, यह आस्था, साधना, प्रेम, चैतन्यता एवं संस्कार से परिपूर्ण एक केन्द्र है जहाँ स्वयं जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी विराजती हैं। भौतिक जगत में मणिद्वीप जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी के दिव्य लोक का प्रतीक है। यह स्थान चैतन्य कणों से सराबोर साधनास्थली है जहाँ शांत चित्त बैठने मात्र से साधक पूर्णतः सकारात्मक सोच से ओत-प्रोत हो जाता है एवं स्वतः ही आनंद की अनुभूति होने लगती है। यहाँ लगातार आते रहने से व्यक्ति में मानवीय संवेदना, करूणा, संयम और प्रेम का संचार होने लगता है तथा “वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना का उदय होता है। अब प्रश्न यह उठता है कि यह सब कैसे संभव हो सकता है?
यह इसलिये संभव हुआ है क्योंकि यहाँ पर श्री नन्दकिशोर जी शारदा (जिन्हें सभी प्रेम से भैया संबोधित करते हैं) की अनवरत कठोर प्रेम-समर्पण साधना व उनके मार्गदर्शन में सुश्री बसन्ती जी मनिहार (जिन्हें सभी प्रेम से माँ संबोधित करते हैं) की जप, तप व सघन साधना के कारण यह तपोभूमि जाग्रत है। यह स्थल जगत्जननी माँ त्रिपुरसुन्दरी की असीम कृपा व वात्सल्य से ओतप्रोत है।
सन् 1992 में जगत्जननी माँ ने माँ बसन्ती मनिहार को उनकी ध्यानावस्था में बताया कि "मैंने तुम्हारे लिए एक बंगला बना दिया है। प्रारंभ में उस स्थान का नाम 'पवित्र निवास' था लेकिन जगत्जननी माँ की इच्छा से इसका नामकरण 'मणिद्वीप' हुआ। बंगला सन् 1995 में बनकर तैयार हो गया और माँ परिवार 'मणिद्वीप शास्त्री नगर में स्थानांतरित हो गया। 'मणिद्वीप चैतन्य जगत में जगत्जननी "माँ" त्रिपुरसुन्दरी के दिव्य लोक का नाम है। इस कारण भौतिक जगत में 'मणिद्वीप' में जगत्जननी माँ स्वयं विराजती हैं। अतः पृथ्वी पर इसका विशेष महत्व है। मणिद्वीप इस संसार रूपी भवसागर में एक ऐसा द्वीप है, जहाँ पर दुःख, संताप, हिंसा, भय से ग्रसित व्यक्ति आते ही एक परम शांति का अनुभव करते हैं। मणिद्वीप का प्रत्येक कार्य निस्वार्थ, सद्भावना, मानवीय संवेदना से युक्त, करुणा, उदारता, परोपकार की भावना से ओतप्रोत है। जगतजननी माँ के आदेशानुसार भैया श्री नन्दकिषोर शारदा एवं माँ बसन्ती मनिहार ने धनाभाव के कारण शिक्षा से वंचित जरूरतमंद छात्र-छात्राओं के लिए निम्न ट्रस्टों की स्थापना की: - स्वामी विवेकानन्द स्टूडेंट्स वेलफेयर चौरिटेबल ट्रस्ट - माँ शारदामणि ट्रस्ट - ज्ञानयोगी श्री नन्दकिशोर शारदा अध्यात्म केन्द्र इसी श्रृंखला में छात्र-छात्राओं में सुसंस्कार एवं उनके व्यक्तित्व के विकास के लिये रविवार प्रातःकालीन संस्कार कक्षाओं का आयोजन किया गया। उन्होंने सभी छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ाया, ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास पैदा किया, शिक्षा का महत्व समझाया एवं उसके प्रति रुचि पैदा की जिससे छात्राओं में सकारात्मक सोच उत्पन्न हो गई और उनमें सद्गुणों का विकास होने लगा। शिक्षा के क्षेत्र में जनक्रांति सी हो गई और शिक्षित, संस्कारित छात्राएं अच्छी नागरिक बनने लगीं। इसी प्रकार रविवार सायंकालीन ज्ञान चर्चाओं में माँ बसन्ती जी ने भैयाजी प्रदत्त बुद्धि-विवेक आधारित साधना पद्धति एवं ज्ञान द्वारा मानव जीवन के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अध्यात्म व भौतिकता का समन्वय कर, जिज्ञासुओं को मार्गदर्शन प्रदान किया जिससे भौतिक संसार में रहते हुए भी वे उत्साह, उमंग व आनंद प्राप्त कर आनंदमय जीवन जीने लगे और अध्यात्म की ओर अग्रसर होने लगे। माँ बसन्ती जी के चैतन्यस्वरूप होने के पश्चात अब मधु माँ सभी जिज्ञासुओं को मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं। माँ बसन्ती जी का हृदय करुणा का सागर था। कोरोना काल में जरूरतमंद परिवारों की अत्यंत ही दयनीय स्थिति को देखते हुए उन्होंने अक्टूबर 2020 में निर्णय लिया कि प्रत्येक माह खाद्यान्न का वितरण किया जाये जो अनवरत जारी है। वर्तमान में 220 से अधिक परिवार इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। साथ ही सद्साहित्य का प्रकाशन एवं निःशुल्क वितरण हेतु श्री नन्दकिशोर शारदा ज्ञान गंगा मिशन की स्थापना माँ बसन्ती जी एवं मधु माँ द्वारा की गयी जिसका मुख्य उद्देश्य है, परमश्रद्धेय भैया श्री नन्दकिषोर जी शारदा को जगत्जननी माँ प्रदत्त दिव्य अमूल्य ज्ञान "मृत्यु के बाद का अलौकिक संसार" पुस्तक, उनके चिंतन एवं दस्तावेज (जैसे व्यक्तिगत डायरी) आदि को प्रकाशित कर उनका प्रचार-प्रसार करना ताकि वर्तमान युग के लोगों एवं भावी पीढ़ी के लिए सही मार्ग प्रशस्त हो सके।
यह परिवार न सिर्फ राष्ट्र का कल्याण अपितु समस्त विश्व में आनंद, शांति, खुशी फैलाने में प्रयासरत है। इस परिवार का लक्ष्य है कि पूरे विश्व में बंधुत्व की भावना से आपस में तारतम्य बने और शांति आए। विश्व में शांति आएगी तो मानव मन में शांति आएगी। मानव मन में शांति तब आएगी जब वह इस अध्यात्म ज्ञान को धारण करेगा। यह परिवार इस दिशा में प्रयासरत है क्योंकि यह एक सतत प्रक्रिया है। मणिद्वीप एक ऐसा परिवार है जो आपसी प्रेम से बना हुआ है, जिसका आधार ही विशुद्ध प्रेम है। मणिद्वीप एक ऐसा अलौकिक स्थान है जहाँ कण-कण में आध्यात्मिक ऊर्जा फैली हुई है। अतः इस धरा पर मणिद्वीप वह पवित्र स्थल है जहाँ उच्च कोटि की साधना सीखी व की जा सकती है एवं गृहस्थ में रहकर भी आध्यात्मिक उन्नति की जा सकती है।
प्रतीक चिन्ह अर्थात पहचान, मणिदीप की पहचान - विश्व बंधुत्व, विश्व शांति व मानव कल्याण हेतु प्रयासरत एवं समर्पित 'मणिद्वीप अध्यात्म परिवार'। इस प्रतीक चिन्ह की विशेषता है कि यह किसी धर्म विशेष से संबंधित नहीं है। कोई भी इसे अपनाकर अपना कल्याण कर सकता है।