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ज्ञान चर्चा

50 वर्ष की आयु पार करने पर सामान्यतः व्यक्ति अंधी दौड़ में ठहर कर पीछ े मुड़कर देखता है तो उसे यह महसूस होता है कि भौतिकवाद की उपलब्धियों के बीच उसके जीवन में एक खालीपन है और जीवन आनन्दरहित है। कमोबेशी ऐसी ही स्थिति होती है जब मनुष्य सेवा निवृत्त होता है तो सक्रिय जीवन में एकाएक ठहराव आ जाता है। ऐसी मानसिकता में व्यक्ति को जीवन में अध्यात्म का महत्वव उपयोगिता समझ में आती है। उसके सामने यक्ष प्रश्न होता है कि वह कहाँ जाये? उसकी समस्या का समाधान है मणिदीप की अध्यात्मिक ज्ञानचर्चाओं में।

यह ज्ञानचर्चा में मूलतः वयस्क एवं गृहस्थ लोगों के लिये विशेष रूप से आयोजित की जाती है। प्रत्येक रविवार सायं काल 7:00 से 8:30 बजे मणिद्वीप में आध्यात्मिक ज्ञानचर्चाओं का आयोजन होता है जिसमें माँ बसन्ती, जिन्होंने भैया श्री नन्दकिशोर शारदा के मार्गदर्शन में साधना सीखी व की, मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में वैज्ञानिक आधार के साथ व्यावहारिक व अध्यात्मिक ज्ञान सिखाती हैं। आज के विज्ञान व भौतिकवाद के प्रलोभनों से जो तनाव पूर्ण परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रही है उनके समाधान हेतु ज्ञान व बुद्धि-विवेक योग साधना पद्धति अपने अनुभव के आधार पर समझातीहै जिससे -

  • विवेक-बुद्धि जाग्रत हो।
  • घर में शान्ति हो व रिश्तों का अर्थ समझकर प्रेम से रहें।
  • सकारात्मक विचारधारा एवं नैतिकता से उत्प्रेरित हो तनाव मुक्त जीवन जी सकें।
  • अध्यात्मिक गुणों का विकास कर सकें व अपने चरित्र एवं व्यक्तित्व को उन्नतकर ईश्वर से सम्बंध बना सके।

 

इन अध्यात्मिक ज्ञानचर्चाओं में जो भी उपस्थित हो रहे हैं वे मानव जीवन लेने के मुख्य उद्देश्य, आनन्द, शांति से जीना, ईश्वर को प्राप्त करने का प्रयास करना व सद्गुणों का विकास करना इत्यादि सभी कुछ कर पा रहे हैं व तनावरहित जीवन जीकर समझदारी व सकारात्मक ढंग से जीते हैं।

माँ त्रिपुरसुन्दरी के लाडले श्रीनन्दकिशोर शारदा प्रदत "बुद्धि-विवेक योग साधना पद्धति एक मास्टर कुंजी है जिसके द्वारा शिक्षित एवं दीक्षित मणिद्वीप परिवार के सदस्यों ने भारत के प्रधानमंत्री के "स्वच्छभारत अभियान एवं "नारीशिक्षा व सशक्तिकरण में न केवल सक्रिय योगदान दे रहे हैं अपितु अन्य लोगों को भी प्रेरित कर रहे हैं। इन लोगों ने आमजन छात्र-छात्राओं को शिक्षित, संस्कारित चरित्र निर्माण व आध्यात्मिक उन्नति की और अग्रसर करने का बीड़ा उठाया है। साथ ही भौतिक वातावरण एवं पर्यावरण को शुद्ध एवं परिष्कृतकर स्वस्थतन, मन एवं सकारात्मक सोच द्वारा देश को समृद्धि एवं विकास की ओर अग्रसर कर रहे हैं।

बुद्धि-विवेक योग साधनापद्धति द्वारा विश्व-बंधुत्व, विश्व शांति व "वसुधैव कुटुम्बकम्" की स्थापना हो रही है तथा इसी से भारतविश्व गुरु बन सकता है।