पिछली सदी में समाज के एक बड़े वर्ग में यह एक विभीषिका ही थी कि परिवार की धुरी होते हुए भी नारी को वह स्थान प्राप्त नहीं था जिसकी वह अधिकारिणी थी। उसका मुख्य कारण था सदियों से चली आ रही कुरीतियाँ, अंधविश्वास व बालिका शिक्षा के प्रति संकीर्णता । पिछले डेढ़ दशक से बालिका / महिला सशक्तिकरण के अंतर्गत महिलाओं से जुड़े सामाजिक आर्थिक राजनैतिक और कानूनी मुद्दों पर संवेदनशीलता और सरोकार व्यक्त किया जाता रहा है। महिला सशक्तिकरण शैतिक, आध्यात्मिक, शारीरिक एवं मानसिक सभी स्तर पर महिलाओं में जागृति व आत्मविश्वास पैदा कर उन्हें सशक्त बनाने की प्रक्रिया है। सामान्य तौर पर नारी सशक्तिकरण में सिर्फ महिलाओं के अधिकारों पर बल दिया जाता है- कर्त्तव्यों के प्रति कोई जागरुकता नहीं है। इसी कारण इतने वर्षों के बाद भी नारी सशक्तिकरण से देश को जो लाभ मिलना चाहिये था वह नहीं मिल सका।
प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली में शिक्षा एवं संस्कार दोनों का समावेश था। उस समय गुरुकुल की व्यवस्था हुआ करती थी। उस समय नारी-पुरुष को समाज में समान अधिकार प्राप्त थे जिसके फलस्वरुप एक सुदृढ समाज व परिवार की नींव बनती थी। कालांतर में लार्ड मैकाले द्वारा शिक्षा प्रणाली को संस्कारविहीन कर दिया गया परिणामस्वरुप नैतिक मूल्यों का हास हो गया और भारतवर्ष पूर्णतया अपना गौरव खो बैठा।
नारी सशक्तिकरण के लिये यह अतिआवश्यक है कि नारी को अधिकारों के साथ कर्त्तव्यों का बोध हो, शिक्षा के साथ संस्कारों का भी समावेश हो । साथ ही बुनियादी मूल्यों बवतम अंसनमेव के प्रति भी जागरुकता हो। इन सब का अगर जीवन में समावेश किया जाये तो नारी सशक्तिकरण सही मायने में पूर्णतया प्राप्त होगा और जो देश की आज दुर्दशा है उससे मुक्ति मिलेगी। देश की कई जटिल समस्याओं के समाधान के लिये यह सही दिशा में एक अर्थपूर्ण कदम है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता भी नारी सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण अंग हैं। बालिकाओं को स्वस्थ जीवन जीने की कला भी आनी चाहिए क्योंकि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है। अच्छा स्वास्थ्य जीवन की प्राथमिकता है। संस्कृत में एक श्लोक है
- धर्म अर्थ काम मोक्षाण, आरोग्य मूल कारणम् ।
अर्थात धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष के लिये आरोग्य (स्वस्थ शरीर) मूल कारण है। इस श्लोक से जीवन के हर क्षेत्र में स्वास्थ्य के महत्व को समझाया गया है।
हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों ने अच्छे स्वास्थ्य व दीर्घजीवन के लिए योग-प्राणायाम इत्यादि पर अत्याधिक जोर दिया। स्वस्थ माँ एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देती है और उसी से एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण होता है।